दीक्षा लेकर प. पू. कृपानिधी म. सा. और प. पू. कर्तव्यनिधि म.सा. का मिला नाम,22 फरवरी का दिन जैन दीक्षा इतिहास के पन्नो में दर्ज, दीक्षा कार्यक्रम में उमड़ा जनसमुदाय

बालाघाट. जो जीवन मातृभूमि और समाज की सेवा में समर्पित हो जायें, वह जीवन धन्य होता है, जीवन सार संयम के साथ सांसरिक जीवन त्यागकर तपस्या और अध्यात्म के जीवन में जिले की दो मुमुक्षु बहनों ने 22 फरवरी को प. पू. श्री जिनपीयूष सागर सूरीश्वर जी म. सा. आदि ठाणा 6, साध्वी जिनशिशु प्रज्ञा श्री म. सा. एवं साध्वी प्रियंकाश्री म. सा. ठाणा के सानिध्य में दीक्षा ग्रहण की. दीक्षा के बाद सांसरिक जीवन में श्रीमती कंचन सुरेश कोचर प. पू. कृपानिधि म. सा. और कु़. क्षमा बोथरा प. पू. कर्तव्यनिधि म. सा. के नाम से पहचानी जायेगी. जो साध्वी जिनशिशु प्रज्ञा श्री म. सा. की शिष्या बनी है, संयम पथ पर 23 फरवरी को यह जिले से विहार करेगी.

बालाघाट की पावन धरा से दो मुमुक्षु बहनों के दीक्षा ग्रहण करने के बाद बालाघाट ने जैन समाज को 29 साधु, साध्वी समर्पित किये है. जो जिले का गौरवमयी इतिहास है. 22 फरवरी को बालाघाट की पावन भूमि पर नगर के उत्कृष्ट विद्यालय मैदान में पावन जैन दीक्षा महोत्सव का आयोजन प. पू. श्री जिनपीयूष सागर सूरीश्वर जी म. सा. आदि ठाणा 6 सानिध्य में किया गया. जिसमें ‘‘संयम जीवन सार है बाकी सब बेकार है’’ के भाव को जिले के प्रतिष्ठित कोचर और बोथरा परिवार की श्रीमती कंचन सुरेश कोचर और बेटी कु. क्षमा बोथरा दीक्षा ग्रहण की.  

22 फरवरी को सांसरिक जीवन को त्यागकर सुबह आखिरी बार घर से दीक्षा ग्रहण कर रही मुमुक्षु बहनों की विदाई हुई. जो बड़ा ही भावुक क्षण था पर परिवार के चेहरे पर गौरवमयी इतिहास रचने जा रहे परिवार के सदस्य के अध्यात्म जीवन की ओर जाने की खुशी भी थी. मुमुक्षु श्रीमती कंचन देवी धर्मपत्नी स्व सुरेशजी कोचर एवं कु क्षमा सुपुत्री भारती निर्मलजी बोथरा की भव्य भगवती दीक्षा के पूर्व प्रातः 6 बजे मुमुक्षु बहने अपने घर से दीक्षा स्थल के लिए परिवार के साथ निकली. प्रातः 7 बजे लापसी लूट का कार्यक्रम के बाद प्रातः 7. 30 बजे से दीक्षा विधि प्रारंभ की गई. जिसमें विधि के बाद मुमुक्षु बहनो ने अध्यात्म जीवन पर बढ़ चली.  

सांसरिक जीवन को त्यागकर प्रभु मार्ग पर चलने मुमुक्षु बहनों की दीक्षा कार्यक्रम में शामिल होने अपार जनसमूह मौजूद था. बालाघाट में दीक्षा ग्रहण कर रही मुमुक्षु मुमुक्षु श्रीमती कंचन देवी धर्मपत्नी स्व सुरेशजी कोचर एवं कु क्षमा सुपुत्री भारती निर्मलजी बोथरा के दीक्षा कार्यक्रम की हजारों आंखे गवाह बनी. जब सांसरिक जीवन को त्यागकर आध्यात्म के पथ पर बढ़ते हुए मुमुक्षु बहनों को लोगो ने देखा.  

बालाघाट के इतिहास में दर्ज हुआ भव्य दीक्षा महोत्सव

प. पू. खरतरगच्छाचार्य नमिऊण तीर्थ प्रणेता श्री जिनपीयूषसागरसूरीश्वरजी म. सा. के मुखारविंद से चतुर्विध संघ की साक्षी मे जय-जय कारो के बीच दोनों मुमुक्षु बहनो की  दीक्षा संपन्न हुई दोनों दीक्षार्थी अष्टापद तीर्थ प्रेरिका, वर्धमान तपाराधिका प. पू. साध्वी जिनशिशु श्री प्रज्ञाश्रीजी म. सा. की सुशिष्या बनी श्रीमती कंचनदेवी कोचर बनी प. पू. साध्वी श्री कृपानिधि श्री म. सा. एवं कु. क्षमा बोथरा बनी प. पू. साध्वी श्री कर्तव्य निधिश्री जी म. सा. आज उगते सूरज के साथ दोनों मुमक्षु बहनें 6. 30 बजे अपने सारे सांसारिक रिश्तो को छोड़कर अध्यात्म के पथ पर बढ़ने के लिए निकल चुकी थी. परिवार ने खुशी के आंसुओं के साथ दोनों को संयम पथ में आगे बढ़ने के लिए सहर्ष विदाई दी. लगभग 8 बजे उत्कृष्ट विद्यालय स्थित दीक्षा स्थल में दोनों मुमक्षु बहनों की दीक्षा विधि प. पू आचार्य भगवन पियूष सागर जी म. सा की निश्रा में प्रारंभ की गई कुछ देर में वो पल भी आ गया जब आचार्य भगवन द्वारा दोनों बहनों को ओघा प्रदान किया गया. यही वो पल था जिसका इन्तजार मुमुक्षु बहने पिछले कई दिनों से कर रही थी. ओघा मिलते ही दोनों मुमक्षु बहनों ने झूमते गाते संगीत के साथ अपनी खुशी जाहिर की ओघा मिलने के बाद वेश परिवर्तन का समय भी आ गया जब अपने रंग बिरंगे परिधानों को त्याग कर दोनों मुमुक्षु बहनो ने साधु वेश धारण किया. जैसे ही वेश परिवर्तन कर दोनों बहनें दीक्षा स्थल पर प्रवेश किया दोनों के चेहरो पर अलग ही प्रसन्नता थी उपस्थित जन समुदाय ने नम आँखों से उन्हें इस वेश में देखकर जय-जयकार कर रहा था. लगभग 12 बजे दोनों बहनों ने आचार्य भगवान के मुखारबिंद से दीक्षा ग्रहण की इस दीक्षा महोत्सव पर 29 साधु साध्वी भगवंतों की उपस्थिति ने इस महोत्सव को ऐतिहासिक रूप प्रदान किया.  

इस महोत्सव में सकल जैन समाज के अलावा अन्य सामाजिक बंधू भी बालाघाट पहुंचे. जिसमें जिले के ही नहीं बल्कि मुम्बई, जयपुर, जगदलपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, नागपुर, गोंदिया, सिवनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, करेली, गाडरवारा तथा अन्य प्रांत के लोग भी इस दीक्षा के गवाह बने. पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट एवं जैन भगवती दीक्षा महोत्सव समिति ने महोत्सव को सफल बनाने में मिले सहयोग के लिए विधायक गौरीशंकर बिसेन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, यातायात विभाग, नगरपालिका, प्राचार्य शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाली सभी संस्थायें एवं विशेष सहयोगी डॉ. चंद्रशेखर चतुरमोहता, संयोग कोचर, विकास कांकरिया, अखिल वैद्य, अनिल वैद्य, जैन समाज की सभी संस्थाये, सभी पत्रकारगण एवं इस दीक्षा महोत्सव के प्रमुख लाभार्थी बोथरा परिवार, कोचर परिवार  एवं जिन्होंने भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान किया, उन सभी के प्रति आभार व्यक्त किया.


Web Title : TAKING INITIATION IN B.C. THE GRACE OF M. S.A. AND B.C. DUTY FUND THE NAME OF THE 22ND FEBRUARY, THE JAIN INITIATION RECORDED IN THE PANNO OF HISTORY, THE INITIATION PROGRAMME IN THE UMADA MASSES