तिरोड़ी में मनाया गया संविधान दिवस, सैकड़ो लोगों ने एक साथ किया संविधान की प्रस्तावना का वाचन

कटंगी. क्षेत्र की मायॅल नगरी तिरोड़ी में 26 दिसबंर को संविधान दिवस के मौके पर ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. संविधान जनजागृति मंच (एकता परिषद) तिरोड़ी-कटंगी के तत्वाधान में यहां के दुर्गा ग्रांउड में सैकड़ो की संख्या में मौजूद लोगों ने एक साथ संविधान की प्रस्तावना का वाचन कर इतिहास बना डाला. इस समारोह में तिरोड़ी, पौनियां, बोनकट्टा, कटंगी सहित अन्य आसपास के ग्रामीण अंचलों में सभी वर्ग के लोग पहुंचे. वहीं शासकीय हाईस्कुल तिरोड़ी के विद्यार्थियों ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया. संविधान दिवस सम्मेलन की शुरूआत में सर्वप्रथम संविधान शिल्पकार डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र के समक्ष पूजन किया गया तत्पश्चात प्रस्तावन का वाचन किया गया. संविधान दिवस के मौके पर मंचीय कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया.

संविधान की प्रस्तावना के वाचन पश्चात मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें भारतीय संविधान प्रचारिणी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता धनीराम, बिरसा बिग्रेड राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश पेंदाम, मुस्लिम एसोसिएन नूरी नागपुर राष्ट्रीय प्रवक्ता तौफिक पटेल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे. इनके अलावा मंच पर इंजिनियर प्रशांत मेश्राम, चिंतक आर. के. सूर्यवंशी, ग्राम पंचायत तिरोड़ी प्रधान आंनद बरमैया, असलम भाई, हाजी सोहेब अली, रामकुमार अग्रवाल सहित अन्य मंचासीन रहे. मंचीय कार्यक्रम के दौरान कवि दिनेश देहाती, माधुरी किरण, हेमंत मोहारे, राजेन्द्र मेश्राम ने भारत और संविधान जुड़ी कविताओं का काव्यपाठ किया.

देश संविधान से चलता है-आर. के. सूर्यवंशी

संविधान दिवस के मंचीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिंतक आर. के. सूर्यवंशी ने कहा कि यह देश संविधान से चलता है. उन्होनें कहा कि 26 नवबंर को तय किया गया कि 26 जनवरी को भारतीय संविधान को लागू किया जाएगा. इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि 26 जनवरी 1930 को झेलन नदी के किनारे कांग्रेस की एक बैठक थी और इस बैठक में यह तय किया गया था कि आजादी के आंदोलन को तेज करना है. इस दिन को यादगार बनाने के लिए 26 जनवरी को भारतीय संविधान को लागू किया गया. उन्होनें कहा कि संविधान दिवस को प्रत्येक भारतीय को अन्य राष्ट्रीय पर्व यानी त्यौहार की तरह मनाना चाहिए.

हर समस्या का समाधान भारतीय संविधान-हाजी सोहेब

सम्मेलन को संबोधित करते हुए हाजी सोहेब ने कहा कि भारतीय संविधान हमें सभी पर्व मनाने की आजादी देता है. हिन्दू-मुस्लिम हो या फिर कोई भी जाति-धर्म संप्रदाय के लोग इसी संविधान की बदौलत वह अपने त्यौहार मनाते है. इसलिए घर-घर तक संविधान को पहुंचाना हमारा मकसद होना चाहिए. जब घर-घर संविधान पहुंचेगा तभी लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी होगा. हर समस्या का समाधान भारतीय संविधान है. उन्होनें बाबा साहब के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि बाबा साहब ने तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संविधान की स्थापना की. संविधान ने सभी को बराबर का हक अधिकार दिया. संविधान हमें सौंपा गया गुलदस्ता है. जिसकी सुरक्षा करना और उसका पालन करना हम सभी की जिम्मेदारी है.

धर्मगुरू-धर्मग्रंथ से भी ऊपर है संविधान- अधिवक्ता धनीराम

भारतीय संविधान प्रचारिणी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता धनीराम ने कहा कि भारतीय संविधान वह नियम है जिससे यह देश चलता है, देश की सरकार चलती है जनता नियंत्रित होती है संविधान देश का सबसे बड़ा नियम और कानून है. वह देश के सभी रीति-रिवाज, प्रथा-पंरपरा से ऊपर है. देश की समस्त ताकत संसद, न्यायालय, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, धर्मगुरू-धर्मग्रंथ से भी ऊपर है. संविधान सर्वव्यापक है जिसके प्रभाव से कोई नहीं बच सकता. उन्हांेने संविधान की अनुच्छेद का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह से इसमें शामिल अनुच्छेद व्यक्ति को उसके अधिकार प्रदान करते है. संविधान ने सभी को अधिकार दिया है. संविधान को लागु होने के 72 वर्ष बीतने के बाद भी लोगों को उनके अधिकार नहीं बताया गया. आज संकल्प ले कि भारतीय संविधान को पढ़ेगें और अपने अधिकारों को जानेगें. जब आप अपने अधिकारों को जानेगें तभी आपको कुछ हासिल होगा.

अज्ञानता के चलते आज न्याय मिलता नहीं बल्कि बिकता है-तौफिक पटले

मुस्लिम एसोसिएन नूरी नागपुर राष्ट्रीय प्रवक्ता तौफिक पटेल ने कहा कि हम संविधान दिवस मनाकर बाबा साहब पर कोई एहसान नहीं कर रहे है. देश को जो संविधान मिला है उसे पूरी दुनिया श्रेष्ट समझती है. उन्होनें कहा कि बाबा साहब के विचारों को आगे बढ़ाने का काम ईमानदारी से नहीं हो रहा है. बाबा साहब ने कभी नहीं कहा था कि उनकी प्रतिमा बनाई जाए हम धर्म के लोग अपने धर्मग्रंथो को मानते है. मुस्लिम अपने घर में कुरान रखता है हिन्दू रामायण रखता है पंरतु कोई भी सबसे बड़ा ग्रंथ भारतीय संविधान अपने घर पर नहीं रखता. यह दुख का विषय है. इसी अज्ञानता के चलते आज न्याय मिलता नहीं बल्कि बिकता है. बाबा साहब विश्व वंदनीय है हमें उन्हें समझने और पढ़ने की जरूरत है.

गड़चिरोली और बालाघाट जिले के जंगल में संविधान की किताब जाना चाहिए-पेंदाम

भारतीय संविधान दिवस सम्मेलन के मुख्य वक्ता बिरसा बिग्रेड राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश पेंदाम ने कहा कि देश में कुछ सालों पहले ही संविधान दिवस मनाना शुरू किया गया है देश के हुक्मरानों को कभी जरूरत नहीं पड़ी कि संविधान दिवस मनाये. इस देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और किसी भी सरकारी कार्यालय का चपरासी भी संविधान की वजह से बनता है. उस संविधान को समझाने की और लोगों तक ले जाने की जवाबदारी सहीं तरीके से नहीं निभाई गई. हम गर्व से कहते है कि विश्व में भारत का सबसे सुंदर संविधान है. आज भारत को विश्वगुरू बनाने का प्रचार कर रहे है. विश्व में कहीं भी आदमी भूख से नहीं मरता भारत के बेलघाट में आदमी भूख से मरता है. कुत्ते भूख से नहीं मरते मगर आदिवासी भूख से मरते है. आदिवासी समाज देश का मूलनिवासी है उसे आज कुछ लोग नक्सलवादी और मुस्लिम को आंतकवादी बता रहे है. जिस आदिवासी के शरीर पर कपड़े नहीं है उनकी तस्वीरे लटकाकर आदिवासी संस्कृति बताया जा रहा है. अंडमान निकोबार में आज भी आदिवासियों के शरीर पर कपड़े नहीं है. गड़चिरोली और बालाघाट जिले के जंगल में संविधान की किताब जाना चाहिए.  


Web Title : CONSTITUTION DAY CELEBRATED IN TIRODI, HUNDREDS OF PEOPLE READ THE PREAMBLE TO THE CONSTITUTION TOGETHER