चुनाव नहीं लडने की बात मैंने संगठन को बता चुका है और स्मृति द्धार के स्थल और गुणवत्ता को एप्रूवल के हिसाब से बनाये

बालाघाट. समर्थकों मंे महाकौशल के बड़े नेता के रूप में पहचाने जाने वाले कई बार के विधायक और पूर्व सांसद एवं वर्तमान में आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने आगामी 2023 में चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है, हालांकि यह जानकारी, पूर्व में ही वह संगठन को दे चुके है.  

बालाघाट जिले की राजनीति में आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन का खासा दखल है, खासकर, भाजपा की राजनीति मंे उनका सीधा हस्तक्षेप है और वह सालों से शिरोधार्य नेता है. बालाघाट जिले की सभी 6 विधानसभा और सिवनी की दो सीटो पर उनका सीधा प्रभाव है और यदि वह आगामी 2023 मंे चुनाव नही लड़ते है तो निश्चित ही इसका असर भाजपा की राजनीति में होगा, हालांकि सूत्रों का कहना है कि भाऊ, भले ही चुनाव न लड़े लेकिन लोकसभा की सभी 8 विधानसभा मंे वह पूरी ताकत के साथ, भाजपा के लिए काम करेंगे.  

भले ही उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की बात संगठन और मीडिया से शेयर कर एक सही कदम उठाया है, लेकिन जानकारों की मानें तो भाजपा संगठन में युवा पीढ़ी को अवसर प्रदान करने के लिए एक निर्धारित आयु के राजनीतिक व्यक्ति को भाजपा में वैसे भी प्रत्याशी नहीं बनाये जाने का नियम है. इससे पहले की संगठन, उन्हें चुनाव नहीं लड़ाता, इससे पहले ही संगठन और मीडिया के सामने अपनी इच्छा जाहिर कर भाऊ ने चुनाव से किनारा कर लिया है. हालांकि इसका असर भविष्य मंे क्या होगा, यह तो आने वाले समय बतायेगा. लेकिन दूरभाष पर चर्चा में आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने साफ कर दिया है कि जो वह बात संगठन को चुनाव नहीं लड़ने की वह बता चुके है, वही जानकारी मीडिया को दी है.

वहीं दो दिन पहले हनुमान चौक स्थित दानवीर स्व. राणा हनुमानसिंह के स्मृति द्धार को लेकर उन्होंने सामाजिक संगठन के आयोजन से पीडब्ल्युडी एवं नपा को काम रोक देने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी, उस पर भी भाऊ का अब नरम रूख दिखाई दे रहा है. दूरभाष पर चर्चा मंे आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि स्मृति द्धार के स्थल और निर्माण की गुणवत्ता, एप्रूवल के अनुसार हो, ऐसा मेरा कहना है.

गौरतलब हो कि गत 3 अगस्त को हनुमान चौक में एक संगठन के कार्यक्रम मंे जिला पंचायत के नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राटसिंह सरस्वार के द्वारा किये गये निर्माण कार्यो और स्मृति द्वार को लेकर आयोग अध्यक्ष का सार्वजनिक गुस्सा, काफी चर्चा में रहा था. जिसके बाद नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राटसिंह सरस्वार ने उनकी अध्यक्षता मंे किये गये स्मृति द्वार के भूमिपूजन कार्यक्रम की फोटो मीडिया में जारी कर उन्हें आईना दिखाने का काम किया था. वहीं अपने कार्यो को लेकर खड़े किये गये सवालों का भी उन्होंने जवाब दिया था. जिसके बाद यह समझा जा रहा था कि अब स्मृति द्धार का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है लेकिन दानवीर स्व. राणा हनुमानसिंह स्मृति द्धार को लेकर आयोग अध्यक्ष के दूसरे दिन ही नरम रूख अपनाये जाने से साफ हो गया है कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है और जो प्रमाण, जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राटसिंह सरस्वार ने दिये थे, उससे उन पर कम बल्कि भाऊ पर ही सवाल खड़े होने लगे थे. जिससे बचने के लिए भाऊ ने ठंडे दिमाग से इस मामले में नरम रूख अपनाकर, स्मृति द्धार को लेकर अपनी स्वीकृति दे दी है, ऐसा समझा जा रहा है.


Web Title : I HAVE ALREADY TOLD THE ORGANIZATION NOT TO CONTEST THE ELECTIONS AND THE VENUE AND QUALITY OF THE MEMORIAL SHOULD BE MADE ACCORDING TO THE APPROVAL.