सबसे ज्यादा कांग्रेस और सबसे कम निर्दलीय प्रत्याशी ने खर्च की राशि, 12 लाख से ज्यादा खर्च नहीं कर सके प्रत्याशी, चुनावी खर्च जमा नहीं करने पर बसपा प्रत्याशी को नोटिस

बालाघाट. विधानसभा चुनावो में निर्वाचन आयोग द्वारा प्रत्येक प्रत्याशी के खर्च के लिए 28 लाख रूपये खर्च की सीमा तय की गई थी किन्तु प्रत्याशी इतने मितव्यायी निकले निर्वाचन आयोग की खर्च सीमा से भी काफी कम खर्च कर पूरा चुनाव लड़ लिया. हालांकि अभी मतगणना में लगाये जाने वाले एजेंटो का खर्च बाकी है, वह भी जुड़ जायें तो खर्च में प्रत्याशी आधी राशि भी खर्च नहीं कर सकंे.  

भले ही लोग विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च के आंकड़ो को करोड़ो में बता रहे है किन्तु जो खर्च का प्रत्याशियों ने ब्यौरा दिया है उसमें प्रत्याशियों ने जो खर्च का ब्यौरा दिया है, उसमें प्रत्याशियों ने अपना खर्च आम जनता के खर्च की चर्चा से इतर काफी कम है. बहरहाल प्रत्याशियों के खर्च का ब्यौरा अभी आना बाकी है किन्तु प्रारंभिक खर्च के आंकड़े में कांग्रेस प्रत्याशी विश्वेश्वर भगत ने सबसे ज्यादा 12 लाख रूपये खर्च किया है. जबकि निर्दलीय प्रत्याशी निर्दलीय प्रत्याशी शबनम शमीम अंसारी ने 11 हजार 900 रूपये खर्च किये है. दूसरी ओर हर तीन दिन मंे प्रत्याशियो को खर्च का ब्यौरा देने में देरी करने वाले बसपा प्रत्याशी योगेश समरिते को खर्च की जानकारी देने के लिए नोटिस जारी किया गया है.  

बालाघाट विधानसभा में प्रत्याशी के खर्च का ब्यौरा देने के लिए गठित की गई लेखा टीम को लगभग सभी प्रत्याशियों ने अपने चुनावी खर्च का नामांकन से लेकर मतदान तिथि तक का ब्यौरा दे दिया है. केवल भाजपा प्रत्याशी गौरीशंकर बिसेन द्वारा मुख्यमंत्री की परसवाड़ा और वारासिवनी में हुई सभा का ब्यौरा नहीं दिया गया है. जिसके खर्च का ब्यौरा जुड़ने पर उनके अब तक की खर्च की गई राशि 11 लाख में और इजाफा हो सकता है, जो बमुश्किल साढ़े 11 लाख या 12 लाख तक जा सकता है. जिससे वह चुनावी खर्च में कांग्रेस प्रत्याशी विश्वेश्वर भगत के करीब-करीब पहुंच सकते है.  

बालाघाट विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों ने नामांकन से लेकर मतदान तक जो अपना चुनावी खर्च लेखा टीम के पास दिया है. उसके अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी विश्वेश्वर भगत ने 12 लाख रूपये, भाजपा प्रत्याशी गौरीशंकर बिसेन ने 11 लाख रूपये, बसपा प्रत्याशी योगेश समरिते ने 4 लाख 70 हजार रूपये, सपा प्रत्याशी अनुभा मुंजारे ने 8 लाख 50 हजार रूपये, आप प्रत्याशी अफसाना खान ने 45 हजार रूपये, जितेन्द्र गोयल ने 20 हजार रूपये, सपाक्स प्रत्याशी मनीषा वैद्य ने 3 लाख 57 हजार रूपये, शबाना शमीम अंसारी ने 11 हजार 900 रूपये, पीपुल्स ऑफ इंडिया पार्टी के प्रत्याशी शंकर कनसरे ने 62 हजार रूपये, अधिवक्ता सत्यप्रकाश सुलखे ने 53 हजार 500 रूपये, अनुराग चतुरमोहता ने 4 लाख 52 हजार रूपये, निर्दलीय प्रत्याशी किरण मड़ावी ने एक लाख 73 हजार रूपये, दिपक पटले ने 43 हजार 135 रूपये, दिपक पींचा ने 28 हजार रूपये, बाबुलाल भगत ने 61 हजार 500 रूपये, मनोरमा नागेश्वर ने 63 हजार 500 रूपये, श्याम मोहन पात्रे ने 32 हजार रूपये और हरिचंद्र माहुरे ने 39 हजार 500 रूपये के चुनावी खर्च का ब्यौरा दिया है.  

राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव मंे जिस प्रकार की मितव्ययिता दिखाई है, उससे लगता है कि चुनाव में जिस खर्च होने की चर्चायें होती है वह तो केवल चर्चायें है जबकि इसकी वैधानिक हकीकत कुछ और है और वह चुनावी लेखा टीम को दिया गया खर्च, जिसमें जिस मितव्ययिता से प्रत्याशियों ने खर्च किया है, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है, जिससे चुनाव महंगा होता है कहने वाले की जुबा पर ताले लग गये है.  


Web Title : THE HIGHEST CONGRESS AND THE LOWEST INDEPENDENTS CANDIDATES CAN NOT SPEND MORE THAN 12 LAKH CANDIDATES, NOT TO DEPOSIT ELECTORAL EXPENSES BUT TO NOTICE THE BSP CANDIDATE