झमाडा कर्मियों की सुरक्षा की चिंता प्रबंधन को नहीं, बिना ऑक्सीजन सिलेंडर युक्त मास्क के उतरते हैं नदी में

झमाडा कर्मियों की सुरक्षा की चिंता प्रबंधन को नहीं, बिना ऑक्सीजन सिलेंडर युक्त मास्क के उतरते हैं नदी में 

झरिया. लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाले झमाडा कर्मियों के सुरक्षा की चिंता प्रबंधन को नहीं है. जान जोखिम में डालकर दामोदर नदी में लगे इंटेकवेल के पंप के बॉल में फंसे कचरे को निकालने के लिए बिना सुरक्षा इंतजाम के नदी में उतरते हैं. सबसे ज्यादा खतरा बरसात के दिनों में तेज धार के दौरान बना रहता है. इसी समय नदी का जलस्तर भी बढ़ जाता है. नदी में तेज धार के साथ जलकुंभी और कचरा भी आता है, जो पंप के बॉल में जाकर फंस जाता है, जिसके कारण नदी से रॉ वाटर के उठाव में परेशानी बढ़ जाती है. यह परेशानी हर वर्ष की है. बॉल में फंसे कचरा को निकालने के लिए नदी में करीब दस फीट नीचे तक जाना पड़ता है. इस दौरान न तो उनके पास सुरक्षा जैकेट रहता है और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर युक्त मास्क रहता है. कर्मियों का कहना है कि उम्र भी ज्यादा हो गई है. अब सांस रोक कर नदी में ज्यादा देर तक नहीं रहा जाता. लेकिन काम करना भी मजबूरी है. क्योंकि लाखों लोगों को जलापूर्ति करना भी जरूरी है. बताया कि सुरक्षा उपकरण में सबसे ज्यादा जरूरत ऑक्सीजन सिलेंडर युक्त मास्क की है.

हर वर्ष 460 आरएल से पार पहुंचता है नदी का जलस्तर:

हर वर्ष अगस्त और सितम्बर माह में नदी का जलस्तर अक्सर बढ़ जाता है. इस दौरान जल स्तर 460 आरएल (रेड्यूस्ड लेवल) से ऊपर चला जाता है. इस स्थिति में नदी में उतरना और भी खतरनाक हो जाता है. उस परिस्थिति में बाहर से गोताखोरों को ठेकेदार के माध्यम से बुलाया जाता है. गोताखोरों को भी बिना सुरक्षा के ही नदी में उतरना पड़ता है.

बन रहा है स्टीमेट, जल्द होगा सुरक्षा उपकरण उपलब्ध:

इस संबंध में झमाडा के झरिया क्षेत्र के एसडीओ पंकज झा ने कहा कि कर्मियों के सुरक्षा को लेकर प्रबंधन भी सजग है. इसके लिए स्टोर डिपार्टमेंट को सुरक्षा जैकेट के लिए स्टीमेट बनाने को कहा गया है. प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जायेगी.


Web Title : MANAGEMENT NOT CONCERNED ABOUT THE SAFETY OF JHAMADA WORKERS, THEY LAND IN THE RIVER WITHOUT MASKS WITH OXYGEN CYLINDERS

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