गोवर्धन पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना

धनबाद : आज पूरे देशभर में गोवर्धन पूजा की धूम है. जिले के सभी गौशालो में तथा घरों में गौ पालन करने वालो ने श्रद्धा भाव के साथ गौवर्धन पूजा की.

गुरुवार को प्रातः काल तेल-स्नान कर ग्वालों ने गो, बछड़ों एवं बैलों की भक्तिपूर्वक पूजा की. विशुनपुर, बारामूड़ी, मनईटांड़ समेत अन्य खटालों में पूजा का आयोजन हुआ.

गाय के शरीर पर लाल एवं पीला रंग लगाने के बाद गाय की सींग पर तेल व गेरू लगाये गये. घर में बने भोजन का प्रथम अंश गाय को खिलाया. इसके बाद गोवर्धन पूजा (अन्न-कूट-पूजा) हुई. सुबह में लोगों ने गोबर से गोवर्धन बनाया.

दरअसल, दीपावली यानी दिवाली के अगले दिन बाद गोवर्द्धन पूजा की जाती है. गोवर्दन पूजा के दिन भगवान कृष्‍ण गोवर्द्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है. इतना ही नहीं, इस दिन 56 या 108 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्‍ण को भोग लगाया जाता है.

इन पकवानों को ´अन्‍नकूट´ भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल गोवर्धन पर्वत को छोटी अंगुली में उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को भगवान इंद्र के कोप से बचाया था.

यानी भगवान कृष्‍ण ने देव राज इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी. गोवर्धन पूजा कार्तिक माह की प्रतिपदा को मनाया जाता है.

इस खास दिन लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाते हैं. मान्यता है कि इस दिन जो भी श्रद्धापूर्वक भगवान गोवर्धन की पूजा करता है, उसे सुख समृद्धि प्राप्त होती है.

Web Title : GOVARDHAN POOJA THE WISH OF HAPPINESS AND PROSPERITY

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