बालाघाट में न बन जाये मुरैना शराब कांड जैसे हालत,जिले में गांव-गांव में बन रही यूरिया से कच्ची शराब

बालाघाट. मुरैना में जहरीली शराब से 20 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है, यहां पुलिस की लापरवाही के कारण बिक रही कच्ची शराब पीने से जहां 20 लोगों की मौत हो गई, वहीं कई लोग अभी भी बीमार बताये जा रहे है, बालाघाट में भी कच्ची शराब का बड़ा कारोबार होता है, यहां जिले के लगभग संपूर्ण तहसील क्षेत्रो के गांव-गांव में कच्ची शराब बनाई जाती है, जिसकी पूरी जानकारी न केवल आबकारी विभाग को है अपितु पुलिस को भी है. हालांकि प्रशासनिक निर्देश के बाद आबकारी अमला कच्ची शराब को लेकर कार्यवाही तो कर रहा है लेकिन पुलिस द्वारा कच्ची शराब को लेकर कार्यवाही ज्यादा नजर नहीं आ रही है, जिससे जिले में भी मुरैना जैसे हालत न बन जायें, इसकी चिंता सताने लगी है.

जिले के इन थाना क्षेत्रो में बड़ी मात्रा में होता है कच्ची शराब का कारोबार

एक जानकारी के अनुसार जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत धापेवाड़ा, पाथरवाड़ा, छोटी कुम्हारी, भरवेली थाना अंतर्गत सुरवाही, भंडारखोह, गोंडीटोला, मरारीटोला, हिरापुर के इमलीटेकरा, मंझारा, गोधीटोला, पायली, पिपरटोला, टेकाड़ी, रट्टा, रोशना, बघोली, रावडबंदी, धनसुआ, गोंदीटोला, ग्रामीण थाना अंतर्गत बगदर्रा, कटंगी, भमोड़ी, आमगांव, समनापुर रेलवे, मगदर्रा, उमरटोला, बहेला थाना अंतर्गत रिसेवाड़ा, वारी, लांजी के टेमनी, पिपलगांव, कोचेवाही, बड़गांव, वारासिवनी के बैगा मोहल्ला, बिटोड़ी, भांडी पिपरिया, तिरोड़ी थाना अंतर्गत सावरगांव, बड़ा जामरापानी, जामुनटोला, आंजनबिहरी, लालबर्रा थाना अंतर्गत छोटीटोला, जाम सहित अन्य ग्रामों, खैरलांजी के सावरी, टेमनी, भौरगढ, खैरी, रामपायली थाना अंतर्गत बिटोड़ी, डोंगरमाली के गांव भेंडारा, बिहोली, कोचेवाही पेंदीटोला, रमरमा, नांदगांव और कटंगी थाना अंतर्गत बिसापुर, मंगलेगांव, जमुनिया सहित अन्य ग्रामो के अलावा बैहर, बिरसा, मलाजखंड, रूपझर और उकवा क्षेत्र के ग्रामो में भी कच्ची शराब का कारोबार किया जाता है, जहां लोग कारोबार के लिए बड़ी मात्रा में कच्ची शराब बनाने का काम करते है.

यूरिया से बनाई जा रही कच्ची शराब

जिले में अब तक महुआ लहान से कच्ची शराब बनाने के मामले प्रकाश में आये है लेकिन सूत्रों की मानें तो महुआ लहान पर कार्यवाही के चलते अब गांव-गांव में फैले कच्ची शराब के कारोबारी यूरिया और बेशरम मिलाकर कच्ची शराब बनाकर विक्रय करने का काम कर रहे है जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से जानलेवा है, जिसका उपयोग जान का जोखिम बन सकती है, बावजूद इसके, इस पर नियंत्रण नहीं होने से कच्ची शराब के कारोबारी गांव-गांव मे कच्ची शराब बनाकर उसे कम दामो में परोसने का काम कर रहे है, जिससे लोग इसके आदि होते जा रहे है.  

कच्ची शराब से हो रहा सरकार को राजस्व का नुकसान

शराब के लायसेंसी कारोबारियों की मानें तो देशी और विदेशी शराब के व्यवसाय के लिए भारी मात्रा में लायसेंस लेने के लिए राजस्व सरकार को देना होता है, जबकि कच्ची शराब के अवैधानिक होने से इसकी कोई लायसेंस नहीं होता है, जिससे सरकार को इसके विक्रय से कोई राजस्व नहीं मिलता लेकिन बड़ी मात्रा में राजस्व का नुकसान होता है, जिसका नुकसान देशी और विदेशी शराब का विक्रय करने वाले लायसेंस ठेकेदारों को उठाना पड़ता है. गांव में बिक रही कच्ची शराब के विक्रय से व्यवसाय को हो रहे नुकसान को लेकर भी शराब कारोबारियों में निराशा है. उनका मानना है कि पुलिस और आबकारी विभाग, इस पर अंकुश लगायें. ताकि मुरैना जैसी कोई घटना बालाघाट जिले में न हो.


इनका है

जिले में आबकारी विभाग द्वारा लगातार कार्यवाही कार्यवाही की जाकर महुआ लहान और कच्ची शराब को बरामद करने का काम कर रहा है, जिसमें अब तक जो कार्यवाही की गई है, उसमें महुआ लहान से ही कच्ची शराब बनाने के जानकारी है और यदि जिले में यूरिया और बेशरम मिलाकर कच्ची शराब बनाने की जानकारी मिलती है तो निश्चित ही कार्यवाही की जायेगी.

विनोद कुमार खटिक, जिला आबकारी अधिकारी


Web Title : NOT TO BECOME IN BALAGHAT, A SITUATION LIKE MORENA LIQUOR SCANDAL, RAW LIQUOR FROM UREA BEING CREATED IN VILLAGE VILLAGE IN THE DISTRICT