मैदान पर पाकिस्तान टीम की नमाज सही, तो फिर धोनी के ग्लव्स से क्या दिक्कत?

जब बात क्रिकेट और देशभक्ति की हो जाती है तो भारतीय फैंस के जोश का कोई सानी नहीं होता है. फिर चाहे क्रिकेटरों को भगवान की तरह पूजना हो या फिर सेना के समर्थन में आ जाना. लेकिन गुरुवार से एक ऐसा विवाद सामने आया है जिससे क्रिकेट और सेना का सम्मान जुड़ गया है. महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर पैरा मिलिट्री फोर्स के बलिदान बैज के निशान को आईसीसी ने हटाने का फरमान दिया है. अब लोगों का कहना है कि जब मैच से पहले खिलाड़ी मैदान में नमाज़ पढ़ सकते हैं, तो फिर ग्लव्स में क्या ही गलत है. फैंस हैं कि मानने को तैयार नहीं हैं और इसे अब सेना के सम्मान से जोड़ दिया है.

महेंद्र सिंह धोनी, प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल हैं. ऐसे में उनके पास आधिकारिक तौर पर ये हक है कि वह इस बैज का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसलिए धोनी ने सम्मान दिखाते हुए अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बलिदान मेडल का निशान लगाया. जब फैंस को पता चला तो हर कोई धोनी का गुणगान करने लगा.

लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल को ये बात रास नहीं आई. आईसीसी ने बीसीसीआई को लिखकर अपील की है कि महेंद्र सिंह धोनी से अपील की जाए कि इस ग्लव्स का इस्तेमाल न करें. जिसपर क्रिकेट जगत, सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग पाकिस्तानी टीम की तस्वीर साझा कर रहे हैं, जिसमें वह मैदान पर ही नमाज़ पढ़ रहे हैं. ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं अगर कोई पूरी टीम मैदान पर अपने धार्मिक भावनाओं को प्रकट कर सकती है तो फिर सिर्फ ग्लव्स पर बैज लगाने से क्या दिक्कत है. जबकि धोनी खुद लेफ्टिनेंट कर्नल हैं.

बता दें कि इससे पहले एक बार जब अफगानिस्तान टीम की भी एक नमाज पढ़ते हुए तस्वीर सामने आई थी, जिसपर काफी विवाद हुआ था. तब इंजमाम उल हक अफगानिस्तान टीम के कोच थे.

नमाज वाली बात को न सिर्फ फैंस, बल्कि बड़ी हस्तियां भी उठा रही हैं, पाकिस्तान के ही तारिक फतेह ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई है. वहीं भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया का भी कहना है कि धोनी के इस तरह के बैज का इस्तेमाल करने में कोई गलती नहीं है, लेकिन अगर आईसीसी के नियम हैं तो उसको भी देखना होगा.

भारतीय ओलंपियन सुशील कुमार ने भी कहा कि जबतक किसी ने कोई शिकायत नहीं की होगी तबतक ये मामला सामने नहीं आया होगा. पाकिस्तान के मंत्री भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए लेकिन नियमों को भी देखना होगा.

दरअसल, आईसीसी का नियम कहता है कि कोई भी खिलाड़ी अपनी ड्रेस पर ऐसा कुछ नहीं इस्तेमाल कर सकता है. जिससे कोई धार्मिक, राजनीतिक या नस्लीय संदेश जाए या फिर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे. हालांकि, एक तर्क ये भी दिया जा रहा है कि आर्मी के बैज से किसी को क्या ही ठेस पहुंच सकती है.

Web Title : ICC DISMISSALS TO MAHENDRA SINGH DHONI ON GLOVES ISSUE

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