आरएसएस का छिपा एजेंडा लागु कर रही प्रदेश सरकार-भगत, कांग्रेस 27 प्रतिशत से ज्यादा निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी को बनायेगी प्रत्याशी

बालाघाट. बिना ओबीसी आरक्षण के निकाय और पंचायत चुनाव कराये जानेे के माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोनो ही पार्टियां भाजपा और कांग्रेस, ओबीसी को साधने लगी है और पूरी निकाय और पंचायत चुनाव के लिए पार्टियों की  जंग का केन्द्र बिंदु ओबीसी बन गया है. दोेनो ही पार्टियांे, स्वयं को एकदूसरे से ज्यादा ओबीसी की हिमायती बताने में लगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एकदूसरे को दोषी बता रही है.

ओबीसी पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और उसके आदेश के बाद निर्वाचन आयोग की चुनाव को लेकर तैयारी के बीच 13 मई को भाजपा और कांग्रेस ने भी प्रेेसवार्ता की.

कांग्रेस ने निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को खत्म करने के लिए भाजपा पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा, आरएसएस के छिपे एजेंडे को लागु कर रही है, जिसकी शुरूआत भाजपा ने ओबीसी से की है, जिसके बाद अब भाजपा अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण को खत्म कर, आरक्षण मुक्त भारत बनाने की दिशा में काम कर रही है.  

जिला कांग्रेस कार्यालय मेें जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विश्वेश्वर भगत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग पर पिछड़ा वर्ग के आंकड़े सही तरीके से पेश नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का ओबीसी विरोधी चेहरा हमेशा से रहा है, तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल में मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा 27 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण दिये जाने के बाद भी इनके ही लोगों ने हाईकोर्ट में इसको चुनौती दी, जहां भी सरकार ने ओबीसी को लेकर अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा. जिसके कारण, प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल सका. यह आजादी के बाद पहला अवसर है, जब ओबीसी को बिना आरक्षण दिये निकाय और स्थानीय चुनाव हो रहे है, जिसके लिए प्रदेश की शिवराजसिंह चौहान की सरकार दोषी है और वह छिपे तरीके से आरएसएस का एजेंटे को लागु कर रही है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण और परिसिमन किया था लेकिन सत्ता को धोखेबाजी से परिवर्तित कर सत्ता में बैठने के बाद भी उसका क्रियान्वयन नहीं किया और वर्ष 2014 के आधार पर अध्यादेश लाकर पंचायत चुनाव थोप दिये, लेकिन उसमें भी सरकार की किरकिरी हुई और सरकार को अंततः अपना अध्यादेश वापस लेना पड़ा. उन्होंने कहा कि सरकार की शुरूआत से ही नियत चुनाव कराने की नहीं रही है, सालों तक पंचायत और निकाय चुनाव को रोके रखा और अब माननीय न्यायालय के आदेश के बाद स्वयं को ओबीसी का हिमायती बता रही है, जबकि ओबीसी वर्ग जानता है कि, भाजपा सरकार ओबीसी विरोधी है और वह ओबीसी को उसका जायज हक नहीं देना चाहती है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव को लेकर जो परिस्थिति निर्मित हुई है, उसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार अब होने वाले निकाय और पंचायत चुनाव में 25 प्रतिशत से ज्यादा ओबीसी उम्मीदवारोें को कांग्रेस अपना प्रत्याशी बनायेगी और जनता के बीच जाकर भाजपा का ओबीसी विरोधी चेहरा उजागर करेगी.

एआईसीसी पूर्व सदस्य श्रीमती पुष्पा बिसेन ने कहा कि 48 प्रतिशत प्रदेश में ओबीसी मतदाता होने के बावजूद उनको आरक्षण नहीं दिलवा पाना, सरकार की सबसे बड़ी नाकामी और ओबीसी वर्ग पर कुठाराघात है. सरकार की अनदेखी ओबीसी वर्ग पर भारी पड़ रही है. उन्होेंने कहा कि यह बहुत चिंतनीय है कि सरकार ने न्यायालय केे सामने मजबूती से ओबीसी को लेकर अपना पक्ष नहीं रखा. जिसके कारण आज यह आदेश आया है. जिसको लेकर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलानाथ जी से लेकर पूरी कांग्रेस चितिंत है. भाजपा ने गुप्त तरीके से आरएसएस के एजेंडें को लागु कर ओबीसी से इसकी शुरूआत की है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है फिर वह शिक्षक पात्रता परीक्षा में ओबीसी चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति हो या फिर ओबीसी छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति का मामला हो, ओबीसी के इन मुद्दो पर भाजपा सरकार का रवैया मौन रहा है. तत्कालीन कांग्रेस सरकार के ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर भी सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार क्रियान्वित नहीं कर सकी और उसको लेकर भी मजबूती से कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा. जिसका जवाब निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग भाजपा को देगा.


Web Title : STATE GOVT IMPLEMENTING RSSS HIDDEN AGENDA, BHAGAT, CONGRESS TO FIELD OBCS IN OVER 27 PER CENT OF THE BODY AND PANCHAYAT ELECTIONS