आयोग की रिपोर्ट को मिला वजन, विश्वसनियता पर लगी मोहर-गौरीशंकर, पंचायत एवं निकाय में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जाहिर कि खुशी

बालाघाट. पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के साथ कराये जाने के सुप्रीम कोर्ट के आये फैसले के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार का ओबीसी वर्ग के आरक्षण के साथ ही चुनाव कराये जाने का संकल्प पूरा हो गया है.   उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला, पूरा देश के लिए एक नजीर बना है, यदि महाराष्ट्र सरकार भी ओबीसी की गणना करवाती और अपनी रिपोर्ट पेश करती तो निश्चित ही महाराष्ट्र में बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत और निकाय चुनाव नहीं होते.  

सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में आयोेग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव, राज्य का आईना होता है किन्तु अपरिहार्य कारणो से यह यह चुनाव समय पर नहीं हो सके. फिर जब चुनाव हुए तो कांग्रेस माननीय न्यायालय चली गई. जिसके बाद ओबीसी को आरक्षण मिले, इसको लेकर सरकार प्रतिबद्ध थी. मामला न्यायालय में विचाराधीन था. माननीय कोर्ट ने कहा कि ट्रिपल टेस्ट का पालन किया जाये. जिसके बाद सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन कर उसे प्रदेश में ओबीसी की स्थिति की जानकारी एकत्रित करने की जिम्मेदारी दी और हमने 6 माह की अल्पावधि में अधिकारियों से ओबीसी की प्रमाणित कापी लेकर राज्य शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी. माननीय न्यायालय में राज्य सरकार और आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. जिसमें जो फैसला आया, उसे ओबीसी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के चलते सरकार ने पुर्नविचार याचिका माननीय न्यायालय मंे पेश की. जिसके बाद माननीय न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा पेश किये गये सैकड़ो पन्नो की रिपोर्ट को वजन देकर और उसकी विश्वसनियता को स्वीकार कर उसमें मोहर लगा दी कि ओबीसी आरक्षण के आधार पर ही पंचायत और निकाय के चुनाव कराये जायें लेकिन 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण न हो. जो सरकार की ओबीसी को पंचायत और निकाय चुनाव में आरक्षण देने का संकल्प को पूरा करता है, जिससे अब पंचायत और निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. इसके बाद अब सरकार और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को फैसला लेना है.

उन्होंने कहा कि आयोग को यह भी अधिकार दिये गये है, जो ओबीसी वर्ग केन्द्रीय सूची में है और राज्य सूची में नहीं है तो भी उसमेें संशोधन करवा सकती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 48 प्रतिशत ओबीसी है और जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को आरक्षण मिलना चाहिये. जिसके लिए हमने महाजन आयोग की तरह प्रदेश में ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की वकालत की है, लेेकिन यह संवैधानिक संशोधन से ही संभव है.  

कांग्रेस ने 27 प्रतिशत बताई थी जनसंख्या

एक सवाल के जवाब में अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी की संख्या के आधार पर आरक्षण दिये जाने की वकालत की थी. जबकि प्रदेश में 48 प्रतिशत ओबीसी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा ओबीसी को छलने और गुमराह करने का काम किया हैं, जबकि भाजपा ने हमेशा ओबीसी के हित में कदम उठाये है और उसकी लड़ाई लड़ी है. जिसका परिणाम है कि आज माननीय न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत एवं निकाय चुनाव कराये जाने के निर्देश निर्वाचन आयोग को दिये है.

ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत एवं निकाय चुनाव के आदेश के बाद आयोग अध्यक्ष का भाजपा ने किया स्वागत

ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत एवं निकाय चुनाव कराये जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन का भाजपा ने गर्मजोशी से स्वागत किया. चूंकि माननीय न्यायालय ने यह फैसला राज्य सरकार की पुर्नविचार याचिका पर आयोग की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर दिया है. जिससे भाजपा इसे गौरीशंकर बिसेन की उपलब्धि बताकर उनका स्वागत कर रही है. इसी कड़ी मंे 19 मई को उनके भोपाल से लौटने पर अलसुबह भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता गोंदिया पहुंचे, जहां स्टेशन में आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया है. वहीं बालाघाट में भी जगह-जगह उनका स्वागत कर उन्हें केलो से तौला गया.


Web Title : THE COMMISSIONS REPORT GOT WEIGHT, THE STAMP ON CREDIBILITY GAURISHANKAR, EXPRESS HAPPINESS OVER THE SUPREME COURTS DECISION ON OBC RESERVATION IN PANCHAYATS AND BODIES