भुख-प्यास या उपचार में लापरवाही बनी शावक तेंदुये की मौत की वजह, शावक तेंदुये का पीएम कर बिसरा किया जब्त, प्रोटोकॉल से किया गया अंतिम संस्कार

बालाघाट. 22 जनवरी को लामता औद्योगिक बांसागर डिपो में अचेत हालत में मिला शावक, अंततः जिंदगी और मौत से लड़ते हुए जिंदगी से जंग हार गया. 24 जनवरी की सुबह उसकी मौत हो गई. जिसका पशु चिकित्सकों द्वारा पीएम करवाकर बिसरा बरामद कर लिया है. जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पायेगा कि आखिर उसकी मौत की वास्तविक वजह क्या थी. हालांकि अचेत हालत में मिले शावक की विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच के बाद भी शावक की मौत हो जाने को लेकर यह सवाल खड़ा होने लगा कि शावक की मौत, मां से बिछड़कर, भुखा-प्यासा रहने से कमजोर होने के कारण हुई है, या फिर प्रोटोकॉल के तहत किये जाने वाले ईलाज में किसी प्रकार की लापरवाही की गई? बहरहाल तेंदुये शावक की मौत के बाद वन्यजीव प्रेमियो में निराशा और दुःख का माहौल है. वहीं प्रोटोकॉल के तहत वन्यजीव शावक तेंदुये का पीएम करवाने के बाद पूरे प्रोटोकॉल के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है.

गौरतलब हो कि 22 जनवरी का तेंदुये का मादा शावक अचेत हालत में लामता औद्योगिक बांसागार डिपो में सायंकाल 4 बजे सुरक्षा श्रमिकों द्वारा देखा गया था. जिसके बाद इसकी जानकारी वनरक्षक को मिली और उसने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी थी. जिसके बाद कान्हा से एक टीम, अचेत मिले तेंदुये के उपचार के लिए डॉ. संदीप अग्रवाल के साथ लामता औद्योगिक बांसागर डिपो पहुंची थी.

जहां अचेत मिले मादा तेंदुये की जांच के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के वाइल्डलाइफ वेटनरी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया था कि अचेत मिले 6 माह के तेदुयें शावक, डिहाइड्रेशन और इमिजेशन स्थिति में था, ऐसा लग रहा है कि तेंदुए का शावक अपनी मां से लगभग 15 दिन पूर्व बिछड़ गया होगा और इस दौरान उसने कुछ खाया पिया भी नहीं है. जिसे आई. वी. इंफ्यूजन, आई. वी. फ्लूट एवं एंटीबायोटिक दिया गया. जबकि बॉडी का टेंपरेचर कम होने के कारण शरीर का टेंपरेचर बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है. इस दौरान उन्होंने बताया कि अभी तेंदुए के शावक की हालत अभी क्रिटिकल बनी हुई है लेकिन दवाइयां दी गई है अगर धीरे-धीरे बॉडी के मूवमेंट आते हैं, तभी कुछ कहा जा सकता है. जिसके बाद टीम रवाना हो गई थी.  

24 की सुबह 8 बजे तक परिक्षेत्र अधिकारी नामदेव की मानें तो तेंदुये का शावक की सांसे चल रही थी, लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई. शावक की मौत के बाद पशु चिकित्सक को बुलवाकर पीएम करवाया गया. जिसके बाद शव का प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया है. वहीं पशु चिकित्सक डॉ. घनश्याम परते और क्षेत्रीय पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद नागेश्वर की मानें तो प्रोटोकॉल के तहत वाईल्डलाईफ चिकित्सक द्वारा उपचार किया गया था. चूंकि भुख और प्यास के कारण शरीर में पानी कम हो जाने और विछोह में शावक ने दम तोड़ दिया. पीएम करवाकर बिसरा बरामद कर लिया गया है. जिसकी रिपोर्ट के बाद ही शावक तेंदुये की मौत के बारे में कहा जा सकता है.

वहीं दूसरी ओर आरोप लगने लगे है कि एक ओर सरकार वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिये करोड़ो रूपये खर्च करने के बावजूद भी वन्य प्राणियों की सुरक्षा में वन विभाग के उच्च अधिकारियों की लापरवाही से वन्य प्राणियों की जाने जा रही है. आरोपों की मानें तो लामता के औधोगिक बांसागार परिसर में मादा तेंदुआ ने उपचार के अभाव में दम तोड़ दिया है. वहीं पशु चिकित्सक की मानें तो शायद निरंतर उपचार होता तो मादा तेंदुआ की मृत्यु नही होती.


Web Title : CAUSE OF DEATH OF CUB LEOPARD DUE TO HUNGER THIRST OR NEGLIGENCE IN TREATMENT, THE CUB LEOPARD WAS SEIZED BY PM, THE FUNERAL WAS PERFORMED BY PROTOCOL